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पुनर्वास परियोजना की परिकल्पना क्यों और कैसे ?

झरिया कोलफिल्ड एक लम्बे अर्से से अग्नि एवं भू-धसान की समस्या से जूझ रहा है एवं इस समस्या से निदान पाने के लिए अनेकानेक प्रयास भी हुए है। इस समस्या से निपटने के लिए वर्ष 1922, 1937, 1953 एवं वर्ष 1957 में विभिन्न समितियाँ गठित हुई किन्तु वे प्रभावी साबित नही हो सकी। वर्ष 1957 में BARAKAR SUBSIDENCE COMMITTEE एवं वर्ष 1976 में श्री एस0 पी0 गुगनानी संयुक्त सचिव, कोयला मंत्रालय, भारत सरकार की अध्यक्षता में पुनः समितियाँ गठित की गई।दिसम्बर 1996 में भारत सरकार ने सचिव, कोयला मंत्रालय के अध्यक्षता में एक समिति का गठन कर इन समस्याओं का समीक्षा कर मास्टर प्लान तैयार करवाने का निर्णय लिया, जो मार्च 1999 मं तैयार हुआ और मई 1999 में बी0सी0सी0एल0 बोर्ड द्वारा पारित हुआ। कालांतर में स्व0 हराधन राय, भूतपूर्व माननीय सांसद द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय में वर्ष 1997 मे ंसमर्पित जनहित याचिका के कारण एक कार्य योजना बनाई गई जो मास्टर प्लान , 1999 में समपिर्तथी। बाद में माननीय उच्चतम न्यायालयके निर्देशानुसार खान सुरक्षा महानिदेशक द्वारा अगस्त 2005 में एक प्रतिवेदन समर्पित किया गया। इस प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक पद्धति सामने नही आ सकी है जिससे इस प्रभावित क्षेत्र को शत-प्रतिशत अग्नि एवं भू-धसान से बचाया जा सके। वर्तमान मास्टर प्लान दिसंबर 1996 में सचिव, कोयला मंत्रालयभारत सरकार की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसा के आलोक में ब्डच्क्प्स् द्वारा तैयार किया गया है एवं मार्च 2008 तक अद्यदित है। मास्टर प्लान की स्वीकृति भारत सरकार, कोयला मंत्रालय, नई दिल्ली के पत्रांक 22020/1/2005 CRC दिनांक 12 अगस्त, 2009 द्वारा संसूचित है एवं इसमें विहित समस्त प्रावधानों की मोनिटरिंग के लिए भारत सरकार, कोयला मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त केंन्द्रीय समिति (High powered central committee) भी गठित है जिसमें खान सुरक्षा महानिदेशक के अतिरिक्त अन्य कई तकनीकी/गैर तकनीकी पदाधिकारीगण सम्मिलित है। इसका स्थायी निदान यही है कि इस क्षेत्र को खाली कराकर प्रभावित परिवारों को अन्यत्र सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वासित कराया जाय। खान सुरक्षा महानिदेशक के उपर्युक्त सुझाव को मूल-मंत्र मानकर भारत सरकार/राज्य सरकार ने निर्णय लिया कि झरिया कोलफिल्ड के अग्नि एवं भू-धसान से प्रभावित गैर बी0सी0सी0एल0 परिवारों को अन्यत्र सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाये एवं उसी स्थल पर इन्हे जीवनोपयोगी सभी सुविधायें भी उपलब्ध करायी जायें। अग्नि एवं भू-धसानसे प्रभावित परिवारों को छोटे-छोटे टुकड़ों में न बसाकर उन्हें मुलभूत सुविधा से सम्पन्न Satellite Township में बसाया जाए। मास्टर प्लान में इसके लिए कुल बारह वर्षो की समय सीमा निर्धारित की गई है जिसमें दो वर्ष प्राक्क्-क्रियान्वयन गतिविधि ( Pre-implementation Activites)के लिए है। इन दो वर्षों में ही आर्थिक एवं सामाजिक सर्वेक्षण कार्य पूरा करना है।